विशेष रिपोर्ट :- यूपी का “समाजवादी दंगल” (Part-2)

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Shabrez rizvi,

लखनऊ 7 दिसम्बर, समाजवादी पार्टी में आंतरिक कलह के बीच अखिलेश खेमे में अहम भूमिका निभा रहे रामगोपाल यादव एक बार फिर चुनाव आयोग के पास पहुंचे. रामगोपाल ने 205 विधायकों के समर्थन का हलफनामा चुनाव आयोग में दिया. साथ ही रामगोपाल ने फिर दावा ठोंका कि असली समाजवादी पार्टी अखिलेश की अगुवाई वाली है. इसके साथ ही उन्होंने साइकिल चुनाव चिह्न अखिलेश की अगुवाई वाली पार्टी को देने की मांग की.

 रामगोपाल यादव ने दावा किया कि सपा में 90 फीसदी से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता अखिलेश के समर्थन में हैं. उन्होंने कहा कि कुल 5731 में 4716 प्रतिनिधियों के हलफनामे भी हम चुनाव आयोग में दायर करेंगे.

वहीं सुलह की आखिरी कोशिशों के बीच लगातार बैठकों और मुलाकातों का दौर जारी है. ऐसे में यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान आज एक बार फिर मुलायम सिंह यादव से मुलाकात कर सुलह की कोशिश करेंगे. सूत्रों के मुताबिक अगर अखिलेश-मुलायम के बीच किसी समझौते पर बात बनी तो मुलायम सिंह याद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोई बड़ा ऐलान भी कर सकते हैं.

उधर समाजवादी पार्टी में अखिलेश गुट का दावा है कि अब अखिलेश ही राष्ट्रीय अध्यक्ष रहेंगे. अखिलेश समर्थकों के मुताबिक पार्टी राष्ट्रीय अधिवेशन के जरिए अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है. ऐसे में पार्टी के 90 फीसदी लोगों ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है अब वह इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते.

इससे पहले अमर सिंह ने शुक्रवार को जो बयान दिया था उस पर भी अखिलेश गुट ने अमर सिंह पर निशाना साधा. समर्थकों का कहना है कि परिवार के निजी रिश्तों का हवाला देकर अखिलेश यादव को इमोशनल ब्लैक मेल किया जा रहा है. अमर सिंह ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा था कि अखिलेश का पालन-पोषण चाचा शिवापाल के घर में हुआ है और वही उनके ज्यादा करीब है. साथ ही अमर सिंह ने मुलायम सिंह पर कहा कि इस पूरे विवाद में नेता जी बिल्कुल अकेले पड़ गए हैं.

वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव चुनाव में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. सूत्रों की मानें तो अखिलेश ने पार्टी का घोषणापत्र तैयार कर लिया है. अगली 10 जनवरी के बाद कभी भी वह अपना घोषणापत्र जारी कर सकते हैं. साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है. 10 जनवरी को अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मुलाकात हो सकती है. इस मुलाकात में गठबंधन पर आखिरी मुहर लग सकती है और सीटों के बंटवारे पर भी समझौता हो सकता है.

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विशेष रिपोर्ट :- यूपी का “समाजवादी दंगल” (Part-1)

लखनऊ 6 दिसम्बर, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी में टिकट के बटवारे को लेकर शिवपाल यादव और अखिलेश यादव में वर्चस्व की लड़ाई छिड गई. डॉ लोहिया के समाजवाद को अपना आदर्श बताने वाले समाजवादियों के ऐसे ऐसे रूप सामने आये, बाहुबल, धनबल और संख्याबल के ऐसे ऐसे मुजाहेरे हुए कि समाजवाद का मतलब ही बदल गया. इस राजनैतिक घमासान से एक बात साबित हो गयी की या तो ये लोग समाजवादी नहीं हैं या फिर ये लोग समाजवाद को समझ नहीं पाए.

शिवपाल यादव और अखिलेश यादव में आपसी तनातनी तो काफी समय से चल रही थी मगर नवम्बर 2016 में ये आपसी तनातनी वर्चस्व की लड़ाई बन कर देश की जनता के सामने आ गई और पार्टी के छोटे बड़े कई नेता इसमें उलझ कर कुर्बान हो गए. रोज़ नये नये हालात बनते और बिगड़ते रहे. कभी अखिलेश यादव के समर्थकों को पार्टी के कार्यक्रमों में मंच से धक्का दिया गया और चुन चुन के उनके समर्थकों के टिकट काटे गए तो कभी शिवपाल यादव और उनके समर्थक मंत्रियों की कुर्सी छीन ली गई और उनको सरकार से बाहर कर दिया गया. इसके जवाब में शिवपाल यादव ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह की सहमति से अपने चचेरे भाई और राज्यसभा सांसद प्रो रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से बहार का रास्ता दिखा दिया मगर अगले ही दिन फिर उनके निष्कासन को रद्द भी कर दिया. रोज़ रोज़ के इस झगडे से आजिज़ आकर अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव ने एक बड़ा क़दम उठाया उन्होंने सबसे पहले पार्टी के विधायकों और समर्थकों को अपने साथ मिलाया और अपने समर्थकों की राष्ट्रीय अधिवेशन नामक एक मीटिंग बुला कर सबसे पहले अमर सिंह को पार्टी से निकाला फिर शिवपाल यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया और अधिवेशन में आये हुए समर्थकों के संख्याबल का उपयोग करते हुए पार्टी कार्यालय पर कब्ज़ा भी कर लिया

अन्दर की बात ……

अन्दर की बात ये है की पार्टी के आज़म खान सरीखे कद्दावर नेता अभी तक जारी इस घमासान को खत्म कराने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं मगर अभी भी बात बनती नहीं दिख रही. आज भी शाम तक लखनऊ में सुलह पर बैठकों का दौर चलता रहा. इस बैठक में मुलायम सिंह, अखिलेश यादव, अमर सिंह और शिवपाल यादव मौजूद थे. आज सुबह शिवपाल यादव अखिलेश से मिलने उनके घर भी गए उनके बीच क्या बातें हुई इसका अभी तक पता नहीं चल पाया. इसके बाद अमर सिंह मुलायम सिंह के घर पहुंचे. बेनी प्रसाद वर्मा भी मुलायम के घर पहुंचे हैं. ये मीटिंग पर खत्म हो गई है. अमर सिंह और शिवपाल वहां से जा चुके हैं. इस बीच, आजम खान मुलायम के घर पहुंचे हैं. सुबह से सुलह के फॉर्मूले पर दोनों पक्षों के नेता सहमति बनाने में लगे हुए थे. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया  हालांकि, दिल्ली में अखिलेश गुट के नेता पार्टी सिंबल पर दावा जताते दिखे. रामगोपाल यादव ने कहा कि अधिकांश, सांसद-विधायक-एमएलसी हमारे साथ हैं और पार्टी सिंबल पर उनका ही हक है. इसी बीच मुलायम सिंह के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की खबर भी आई जिसे बाद में रद्द कर दिया गया.

बयानबाज़ी का दौर अभी भी चल रहा है ……

नेताजी किसी के बहकावे में न आएं : नरेश अग्रवाल
इस मामले पर सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा है कि कुछ लोग नेताजी को उनके बेटे के खिलाफ भड़का रहे हैं. मेरी नेताजी से अपील है कि वह ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं.

amar-singh_1483684387मैं अखिलेश की उन्नति में बाधक नहीं : अमर सिंह
मुलायम से मुलाकात के बाद अमर सिंह ने कहा कि मैं एक साथ 5 विचारधाराओं के साथ नहीं हूं. चोर दरवाजे से राजनीति करने का आदी नहीं हूं. राजनीति काफी क्रूर और निर्मम है. मैं लखनऊ इसलिए आया हूं ताकि पिता-पुत्र के बीच सुलह करा सकूँ.  मैं अखिलेश की उन्नति में बाधक नहीं हूं. मुलायम बे-हैसियत हैं, ये सुनने की हमारी क्षमता नहीं. संख्याबल से किसी की हैसियत हम नहीं समझते. हैसियत व्यक्तित्व से बनती है.

अखिलेश ने करीबियों को चुनाव प्रचार में जुटने को कहा
इधर अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस कलह से दूर अपने-अपने चुनाव क्षेत्र में जाकर फौरन चुनाव प्रचार में जुटने को कहा है.

नरेश अग्रवाल का अमर सिंह पर वार….

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने मुलायम-अखिलेश के बीच सुलह की संभावनाओं पर कहा है कि अगर अमर सिंह लखनऊ ना आते तो मामला सुलझ जाता. लेकिन अब वो यहां आ गए हैं ऐसे में मामला सुलझना मुश्किल है.

अमर सिंह का पलटवार
नरेश अग्रवाल के बयान पर अमर सिंह ने जमकर पलटवार किया है. अमर सिंह ने नरेश अग्रवाल का बिना नाम लिए कहा कि जो लोग सभी पार्टियों में रहे और अपने अनुभव से मुझे बीजेपी का एजेंट कह रहे हैं. मेरा बीजेपी से अभी तक संबंध नहीं रहा है. जिन जिन लोगों का विरोध मुख्यमंत्री ने किया, जो दागी थे आज सब उज्जवल हो गए. सारे दागदार लोगों की छवि साफ हो गए.

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ज्यादातर सांसद-विधायक अखिलेश के साथ- प्रो रामगोपाल यादव 
लखनऊ में सुलह की कोशिशों के बीच रामगोपाल यादव ने दिल्ली में कुछ अलग तरह की बात की. रामगोपाल ने दावा किया कि 229 में से 212 विधायक अखिलेश के साथ हैं. 68 में से 56 एमएलसी और 24 में से 15 सांसद हमारे साथ हैं. इन सभी नेताओं के अखिलेश के पक्ष में हलफनामें पर हस्ताक्षर कर चुके हैं. शुक्रवार शाम तक अखिलेश गुट चुनाव आयोग में अपना जवाब दाखिल करेगा. रामगोपाल यादव ने कहा कि असली समाजवादी पार्टी वही है जो अखिलेश के साथ है और हम चुनाव जीत कर सरकार बनाएंगे. रामगोपाल यादव ने कहा कि साइकिल चुनाव चिन्ह हमें मिलना चाहिए.

mulayam-akhilesh-azam-ptiआजम सुलह की कोशिश में लगे
लखनऊ में पिछले दो दिन से सपा में कलह को सुलझाने और सुलह का फॉर्मूला बनाने में तमाम नेता जुटे हुए हैं. इस बार आजम खान ने जिम्मा उठाया हुआ है. वहीं अकेले नेता हैं जो दोनों गुटों के बीच बात कर रहे हैं. गुरुवार देर रात जब शिवपाल यादव और अमर सिंह, मुलायम सिंह यादव से मिलकर वापस लौटे तो गाड़ी मुलायम सिंह यादव के घर से बाहर निकली और बिना रुके सीधी निकल गई. हालांकि अमर सिंह और शिवपाल पहले कह चुके हैं कि वे दोनों पिता-पुत्र के बीच समझौते के हक में तो हैं लेकिन मुलायम सिंह का सम्मान बरकरार रहना चाहिए.

फ्रंट फुट पर अखिलेश खेमा
इस बीच, अखिलेश के खास माने जाने वाले सपा नेता और एमएलसी सुनील सिंह साजन ने लखनऊ में कहा कि समझौते का कोई मामला ही नहीं है. अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और हम उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रहे हैं. अमर सिंह के इस्तीफे पर सुनील सिंह ने कहा कि इसका सवाल ही नहीं उठता. उन्हें पहले ही पार्टी से निकाल दिया गया है. सुनील सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह का आर्शीवाद हमारे साथ हैं. कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर सुनील सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव इस मामले पर अंतिम फैसला लेंगे.

सुलह पर अभी तक की सहमति?
सूत्रों के अनुसार इस बातचीत में अखिलेश ने अपने समर्थकों से साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव तक अध्यक्ष पद अपने पास रखना चाहते हैं लेकिन नेताजी का सम्मान पूरा बना रहेगा.  पार्टी के भीतर सब कुछ सही सलामत हो जाए, इसके लिए खुद अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को बोला कि अगर उनको किनारे करने से पार्टी में सब ठीक ठाक हो जाता है तो वो खुद इसके लिए तैयार हैं, नेताजी फैसला कर लें. वहीं शिवपाल यादव ने राष्ट्रीय महासचिव बनकर प्रदेश की राजनीति से दूर रहने के प्रस्ताव पर एक कदम आगे बढ़ते हुए कह दिया कि अखिलेश अपने हिसाब से चुनाव लड़ लें, वह इस दौरान पार्टी में निष्क्रिय रहने को तैयार हैं. शिवपाल ने कहा कि जो नेताजी कहेंगे वो उसके लिए तैयार हैं.

आर-पार के मूड में हैं अखिलेश समर्थक 
सपा में मचे घमासान का नतीजा चाहे जो हो लेकिन ये चुनाव अखिलेश यादव के लिए काफी निर्णायक हैं. इसीलिए अखिलेश आर-पार के मूड में हैं. अपने जीवन का सबसे महत्‍वपूर्ण चुनाव लड़ने जा रहे अखिलेश पहली बार पिता की छाया से निकलकर सियासी मोर्चे होंगे. ये खेमा अखिलेश की स्‍वच्‍छ छवि, ईमानदार चेहरे को सियासी पूंजी मानकर चल रही है. गुरुवार को मीटिंग में अखिलेश ने अपने समर्थकों से चुनाव की तैयारी में लगने और विधायकों तथा मंत्रियों को अपने-अपने इलाके में जाकर प्रचार के काम में जुटने को कह दिया.

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